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प्रेरणादायक कहानियाँ | Prernadayak Kahaniyan

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छोटी छोटी प्रेरणादायक कहानियों का औडियो संग्रह है ये पॉडकास्ट। घर के बच्चों को संस्कारित करने में सहायक ये कहानियाँ घर के बड़े सदस्यों के लिए भी motivationa inspirational हैं। सुनिए और सुनाइए……साभार : https://www.achhikhabar.com/hindistories/ एवं इंटरनेट संकलन से

  • प्रेरणादायक कहानियां : आखिरी उपदेश Akhiri updesh
    2 min 45 sec

    प्रेरणादायक कहानियां :  आखिरी उपदेश                                                                        Motivational Stories :  Akhiri updesh                                                                                 Voice :Rachita TandonPrernadayak kahaniyan sangyatandon glass neeche rakh dijiye प्रेरणादायक कहानियां संज्ञाटंडन आखिरी उपदेश  Akhiri updesh

  • प्रेरणादायक कहानियां : दिखावे का फल dikhave ka fal
    2 min 27 sec

    प्रेरणादायक कहानियां : दिखावे का फल                                                                              Motivational Stories : dikhave ka falVoice :Rachita TandonPrernadayak kahaniyan sangyatandon glass neeche rakh dijiye प्रेरणादायक कहानियां संज्ञाटंडन दिखावे का फल  dikhave ka fal

  • प्रेरणादायक कहानियां : एक बाल्टी दूध Ek Balti Doodh
    2 min 25 sec

    प्रेरणादायक कहानियां : एक बाल्टी दूध                                                                              Motivational Stories : Ek Balti DoodhVoice :Rachita TandonPrernadayak kahaniyan sangyatandon glass neeche rakh dijiye प्रेरणादायक कहानियां संज्ञाटंडन एक बाल्टी दूध Ek Balti Doodh

  • प्रेरणादायक कहानियां : बोले हुए शब्द वापस नहीं आते : Bole hue shabd vapis nahi aate
    2 min 1 sec

    बोले हुए शब्द वापस नहीं आतेएक बार एक किसान ने अपने पडोसी को भला बुरा कह दिया, पर जब बाद में उसे अपनी गलती का एहसास हुआ तो वह एक संत के पास गया.उसने संत से अपने शब्द वापस लेने का उपाय पूछा.संत ने किसान से कहा , ” तुम खूब सारे पंख इकठ्ठा कर लो , और उन्हें शहर  के बीचोबीच जाकर रख दो .” किसान ने ऐसा ही किया और फिर संत के पास पहुंच गया.तब संत ने कहा , ” अब जाओ और उन पंखों को इकठ्ठा कर के वापस ले आओ”किसान वापस गया पर तब  तक सारे पंख हवा से इधरउधर उड़ चुके थे. और किसान खाली हाथ संत के पास पहुंचा. तब संत ने उससे कहा कि ठीक ऐसा ही तुम्हारे द्वारा कहे गए शब्दों के साथ होता है,तुम आसानी से इन्हें अपने मुख से निकाल तो सकते हो पर चाह कर भी वापस नहीं ले सकते.इस कहानी से क्या सीख मिलती है:कुछ कड़वा बोलने से पहले ये याद रखें कि भलाबुरा कहने के बाद कुछ भी कर के अपने शब्द वापस नहीं लिए जा सकते. हाँ, आप उस व्यक्ति से जाकर क्षमा ज़रूर मांग सकते हैं, और मांगनी भी चाहिए, पर human nature कुछ ऐसा होता है की कुछ भी कर लीजिये इंसान कहीं ना कहीं hurt हो ही जाता है.जब आप किसी को बुरा कहते हैं तो वह उसे कष्ट पहुंचाने के लिए होता है पर बाद में वो आप ही को अधिक कष्ट देता है. खुद को कष्ट देने से क्या लाभ, इससे अच्छा तो है की चुप रहा जाए

  • प्रेरणादायक कहानियां : मूर्ख राजा और चतुर मंत्री : Murkh Raaj aur Chatur Mantri
    4 min 30 sec

    Prernadayak kahaniyan sangyatandon Murkh Raaj aur Chatur Mantri योगेश पाण्डे Yogesh Pande प्रेरणादायक कहानियां संज्ञाटंडन मूर्खराजाऔरचतुमंत्री

  • प्रेरणादायक कहानियां : एक्सिडेंट : Accident
    2 min 36 sec

    प्रेरणादायक कहानियां : एक्सिडेंट Motivational Stories : AccidentVoice :Rachita TandonPrernadayak kahaniyan sangyatandon glass neeche rakh dijiye प्रेरणादायक कहानियां संज्ञाटंडन एक्सिडेंट  : Accident

  • प्रेरणादायक कहानियां : बाज़ और किसान baaz aur kisan
    3 min 20 sec

    प्रेरणादायक कहानियां : बाज़ और किसान  Motivational Stories : baaz aur kisan                                                                                Voice : Charu ChhabraPrernadayak kahaniyan sangyatandon glass neeche rakh dijiye प्रेरणादायक कहानियां संज्ञाटंडन बाज़औरकिसान:baaz aur kisan

  • प्रेरणादायक कहानियां : बीता हुआ कल beeta hua kal
    3 min 19 sec

    प्रेरणादायक कहानियां : बीता हुआ कल Motivational Stories :  beeta hua kalVoice :Rachita TandonPrernadayak kahaniyan sangyatandon glass neeche rakh dijiye प्रेरणादायक कहानियां संज्ञाटंडन बीताहुआकलbeeta hua kal

  • प्रेरणादायक कहानियां : भिखारी का आत्मसम्मान bhikhari ka atmsamman
    3 min

    प्रेरणादायक कहानियां : भिखारी का आत्मसम्मान Motivational Stories :  bhikhari ka atmsammanVoice :Rachita TandonPrernadayak kahaniyan sangyatandon glass neeche rakh dijiye प्रेरणादायक कहानियां संज्ञाटंडन भिखारीकाआत्मसम्मान :bhikhari ka atmsamman

  • प्रेरणादायक कहानियां : धरती फट रही है dharti fat rahi hai
    3 min 42 sec

    प्रेरणादायक कहानियां : धरती फट रही है  Motivational Stories :  dharti fat rahi haiVoice :Rachita TandonPrernadayak kahaniyan sangyatandon glass neeche rakh dijiye प्रेरणादायक कहानियां संज्ञाटंडन धरती फट रही है dharti fat rahi hai

  • प्रेरणादायक कहानियां : कितने सेब हैं Kitne seb hain.
    3 min 10 sec

    प्रेरणादायक कहानियां : कितने सेब हैं    Motivational Stories : Kitne seb hain.Voice :Rachita TandonPrernadayak kahaniyan sangyatandon glass neeche rakh dijiye प्रेरणादायक कहानियां संज्ञाटंडन कितने सेब हैं  Kitne seb hain.

  • प्रेरणादायक कहानियां : दोस्त का जवाब Dost ka jawaab
    2 min 6 sec

    प्रेरणादायक कहानियां : दोस्त का जवाब                                                                                     Motivational Stories : दोस्त का जवाब Dost ka ja                                                                         Voice :Rachita TandonPrernadayak kahaniyan sangyatandon glass neeche rakh dijiye प्रेरणादायक कहानियां संज्ञाटंडन दोस्त का जवाब Dost ka jawaab

  • प्रेरणादायक कहानियां : जब हवा चलती है Jab hawa chalti hai
    3 min

    प्रेरणादायक कहानियां : जब हवा चलती हैMotivational Stories : Jab hawa chalti haiVoice :Rachita TandonPrernadayak kahaniyan sangyatandon glass neeche rakh dijiye प्रेरणादायक कहानियां संज्ञाटंडन जब हवा चलती है Jab hawa chalti hai

  • प्रेरणादायक कहानियां: एक रुपया : ek rupiya
    2 min 20 sec

    Prernadayak kahaniyan sangyatandon ekrupiya योगेश पाण्डे Yogesh Pande प्रेरणादायक कहानियां संज्ञाटंडन एकरुपया 

  • प्रेरणादायक कहानियां : ग्लास नीचे रख दीजिये : Glass neeche rakh dijiye
    2 min 56 sec

    ग्लास को नीचे रख दीजिये एक प्रोफ़ेसर ने अपने हाथ में पानी से भरा एक glass पकड़ते  हुए class शुरू की . उन्होंने उसे ऊपर उठा कर सभी students को दिखाया और पूछा , ” आपके हिसाब से glass का वज़न कितना होगा”’50gm….100gm…125gm’…छात्रों ने उत्तर दिया.” जब तक मैं इसका वज़न ना कर लूँ  मुझे इसका सही वज़न नहीं बता सकता”. प्रोफ़ेसर ने कहा. ” पर मेरा सवाल है:यदि मैं इस ग्लास को थोड़ी देर तक  इसी तरह उठा कर पकडे रहूँ तो क्या होगा ”‘कुछ नहीं’ …छात्रों ने कहा.‘अच्छा , अगर मैं इसे मैं इसी तरह एक घंटे तक उठाये रहूँ तो क्या होगा ” , प्रोफ़ेसर ने पूछा.‘आपका हाथ दर्द होने लगेगा’, एक छात्र ने कहा.” तुम सही हो, अच्छा अगर मैं इसे इसी तरह पूरे दिन उठाये रहूँ तो का होगा”” आपका हाथ सुन्न हो सकता है, आपके muscle में भारी तनाव आ सकता है , लकवा मार सकता है और पक्का आपको hospital जाना पड़ सकता है”….किसी छात्र ने कहा, और बाकी सभी हंस पड़े…“बहुत अच्छा , पर क्या इस दौरान glass का वज़न बदला” प्रोफ़ेसर ने पूछा.उत्तर आया ..”नहीं”” तब भला हाथ में दर्द और मांशपेशियों में तनाव क्यों आया”Students अचरज में पड़ गए.फिर प्रोफ़ेसर ने पूछा ” अब दर्द से निजात पाने के लिए मैं क्या करूँ”” ग्लास को नीचे रख दीजिये एक छात्र ने कहा.” बिलकुल सही” प्रोफ़ेसर ने कहा.Life की problems भी कुछ इसी तरह होती हैं. इन्हें कुछ देर तक अपने दिमाग में रखिये और लगेगा की सब कुछ ठीक है.उनके बारे में ज्यदा देर सोचिये और आपको पीड़ा होने लगेगी.और इन्हें और भी देर तक अपने दिमाग में रखिये और ये आपको paralyze करने लगेंगी. और आप कुछ नहीं कर पायेंगे.अपने जीवन में आने वाली चुनातियों और समस्याओं के बारे में सोचना ज़रूरी है, पर उससे भी ज्यादा ज़रूरी है दिन के अंत में सोने जाने से पहले उन्हें नीचे रखना.इस तरह से, आप stressed नहीं रहेंगे, आप हर रोज़ मजबूती और ताजगी के साथ उठेंगे और सामने आने वाली किसी भी चुनौती का सामना कर सकेंगे.

  • प्रेरणादायक कहानियां : आज ही क्यों नहीं : Aaj hi kyon nahin
    4 min 35 sec

    आज ही क्यों नहीं  एक बार की बात है कि एक शिष्य अपने गुरु का बहुत आदरसम्मान किया करता था गुरु भी अपने इस शिष्य से बहुत स्नेह करते थे लेकिन  वह शिष्य अपने अध्ययन के प्रति आलसी और स्वभाव से दीर्घसूत्री था सदा स्वाध्याय से दूर भागने की कोशिश  करता तथा आज के काम को कल के लिए छोड़ दिया करता था अब गुरूजी कुछ चिंतित रहने लगे कि कहीं उनका यह शिष्य जीवनसंग्राम में पराजित न हो जायेआलस्य में व्यक्ति को अकर्मण्य बनाने की पूरी सामर्थ्य होती है ऐसा व्यक्ति बिना परिश्रम के ही फलोपभोग की कामना करता है वह शीघ्र निर्णय नहीं ले सकता और यदि ले भी लेता है,तो उसे कार्यान्वित नहीं कर पाता यहाँ तक कि  अपने पर्यावरण के प्रति  भी सजग नहीं रहता है और न भाग्य द्वारा प्रदत्त सुअवसरों का लाभ उठाने की कला में ही प्रवीण हो पता है उन्होंने मन ही मन अपने शिष्य के कल्याण के लिए एक योजना बना ली एक दिन एक काले पत्थर का एक टुकड़ा उसके हाथ में देते हुए गुरु जी ने कहा –‘मैं तुम्हें यह जादुई पत्थर का टुकड़ा, दो दिन के लिए दे कर, कहीं दूसरे गाँव जा रहा हूँ जिस भी लोहे की वस्तु को तुम इससे स्पर्श करोगे, वह स्वर्ण में परिवर्तित हो जायेगी पर याद रहे कि दूसरे दिन सूर्यास्त के पश्चात मैं इसे तुमसे वापस ले लूँगा’शिष्य इस सुअवसर को पाकर बड़ा प्रसन्न हुआ लेकिन आलसी होने के कारण उसने अपना पहला दिन यह कल्पना करतेकरते बिता दिया कि जब उसके पास बहुत सारा स्वर्ण होगा तब वह कितना प्रसन्न, सुखी,समृद्ध और संतुष्ट रहेगा, इतने नौकरचाकर होंगे कि उसे पानी पीने के लिए भी नहीं उठाना पड़ेगा फिर दूसरे दिन जब वह  प्रातःकाल जागा,उसे अच्छी तरह से स्मरण था कि आज स्वर्ण पाने का दूसरा और अंतिम दिन है उसने मन में पक्का विचार किया कि आज वह गुरूजी द्वारा दिए गये काले पत्थर का लाभ ज़रूर उठाएगा उसने निश्चय किया कि वो बाज़ार से लोहे के बड़ेबड़े सामान खरीद कर लायेगा और उन्हें स्वर्ण में परिवर्तित कर देगा. दिन बीतता गया, पर वह इसी सोच में बैठा रहा की अभी तो बहुत समय है, कभी भी बाज़ार जाकर सामान लेता आएगा. उसने सोचा कि अब तो  दोपहर का भोजन करने के पश्चात ही सामान लेने निकलूंगा.पर भोजन करने के बाद उसे विश्राम करने की आदत थी , और उसने बजाये उठ के मेहनत करने के थोड़ी देर आराम करना उचित समझा. पर आलस्य से परिपूर्ण उसका शरीर नीद की गहराइयों में खो गया, और जब वो उठा तो सूर्यास्त होने को था. अब वह जल्दीजल्दी बाज़ार की तरफ भागने लगा, पर रास्ते में ही उसे गुरूजी मिल गए उनको देखते ही वह उनके चरणों पर गिरकर, उस जादुई पत्थर को एक दिन और अपने पास रखने के लिए याचना करने लगा लेकिन गुरूजी नहीं माने और उस शिष्य का धनी होने का सपना चूरचूर हो गया पर इस घटना की वजह से शिष्य को एक बहुत बड़ी सीख मिल गयी: उसे अपने आलस्य पर पछतावा होने लगा, वह समझ गया कि आलस्य उसके जीवन के लिए एक अभिशाप है और उसने प्रण किया कि अब वो कभी भी काम से जी नहीं चुराएगा और एक कर्मठ, सजग और सक्रिय व्यक्ति बन कर दिखायेगा. मित्रों, जीवन में हर किसी को एक से बढ़कर एक अवसर मिलते हैं , पर कई लोग इन्हें बस अपने आलस्य के कारण गवां देते हैं. इसलिए मैं यही कहना चाहती हूँ कि यदि आप सफल, सुखी, भाग्यशाली, धनी अथवा महान  बनना चाहते हैं तो आलस्य और दीर्घसूत्रता को त्यागकर, अपने अंदर विवेक, कष्टसाध्य श्रम,और सतत् जागरूकता जैसे गुणों को विकसित कीजिये और जब कभी आपके मन में किसी आवश्यक काम को टालने का विचार आये तो स्वयं से एक प्रश्न कीजिये – “आज ही क्यों नहीं ”

  • प्रेरणादायक कहानियां : मैं ऐसा क्यों हूँ : Main aisa Kyon hoon
    3 min 25 sec

    प्रेरणादायक कहानियां : मैं ऐसा क्यों हूँ Motivational Stories : Main aisa Kyon hoonVoice : Yogesh Pande Prernadayak kahaniyan sangyatandon glass neeche rakh dijiye प्रेरणादायक कहानियां संज्ञाटंडन मैं ऐसा क्यों हूँ : Main aisa Kyon hoon

  • प्रेरणादायक कहानियां : शेर, लोमड़ी और भिक्षुक Sher, Lomdi aur Bhikshuk
    3 min 10 sec

    प्रेरणादायक कहानियां :  शेर, लोमड़ी और भिक्षुक                                                                              Motivational Stories : Sheer, Lomdi aur BhikshukVoice :Rachita TandonPrernadayak kahaniyan sangyatandon glass neeche rakh dijiye प्रेरणादायक कहानियां संज्ञाटंडन शीर, लोमड़ी और भिक्षुक Sheer, Lomdi aur Bhikshuk

  • प्रेरणादायक कहानियां : फूल का पौधा : Phool ka Paudha
    2 min 30 sec

    Prernadayak kahaniyan sangyatandon Phool ka Paudha योगेश पाण्डे Yogesh Pande प्रेरणादायक कहानियां संज्ञाटंडन फूल का पौधा 

  • प्रेरणादायक कहानियां : अच्छे व्यवहार का रहस्य : Achche Vyavhar ka rahasya
    3 min 10 sec

    प्रेरणादायक कहानियां : अच्छे व्यवहार का रहस्य Motivational Stories : Achche Vyavhar ka rahasyaVoice : Sangya TandonPrernadayak kahaniyan sangyatandon glass neeche rakh dijiye प्रेरणादायक कहानियां संज्ञाटंडन : Achche Vyavhar ka rahasya, अच्छे व्यवहार का रहस्य

  • प्रेरणादायक कहानियां : मकड़ी, चींटी और जाला : Makdi, Chinti aur Jala
    3 min 32 sec

    मकड़ी, चींटी और जालाएक मकड़ी थी. उसने आराम से रहने के लिए एक शानदार जाला बनाने का विचार किया और सोचा की इस जाले मे खूब कीड़ें, मक्खियाँ फसेंगी और मै उसे आहार बनाउंगी और मजे से रहूंगी . उसने कमरे के एक कोने को पसंद किया और वहाँ जाला बुनना शुरू किया. कुछ देर बाद आधा जाला बुन कर तैयार हो गया. यह देखकर वह मकड़ी काफी खुश हुई कि तभी अचानक उसकी नजर एक बिल्ली पर पड़ी जो उसे देखकर हँस रही थी.मकड़ी को गुस्सा आ गया और वह बिल्ली से बोली , ” हँस क्यो रही हो” “हँसू नही तो क्या करू.” , बिल्ली ने जवाब दिया , ” यहाँ मक्खियाँ नही है ये जगह तो बिलकुल साफ सुथरी है, यहाँ कौन आयेगा तेरे जाले मे.”ये बात मकड़ी के गले उतर गई. उसने अच्छी सलाह के लिये बिल्ली को धन्यवाद दिया और जाला अधूरा छोड़कर दूसरी जगह तलाश  करने लगी.  उसने ईधर ऊधर देखा. उसे एक खिड़की नजर आयी और फिर उसमे जाला बुनना शुरू किया कुछ देर तक वह जाला बुनती रही , तभी एक चिड़िया आयी और मकड़ी का मजाक उड़ाते हुए बोली , ” अरे मकड़ी , तू भी कितनी बेवकूफ  है.”“क्यो ”, मकड़ी ने पूछा.चिड़िया उसे समझाने लगी , ” अरे यहां तो खिड़की से तेज हवा आती है. यहा तो तू  अपने जाले के साथ ही उड़ जायेगी.”मकड़ी को चिड़िया की बात ठीक लगीँ और वह वहाँ भी जाला अधूरा बना छोड़कर सोचने लगी अब कहाँ जाला बनायाँ जाये. समय काफी बीत चूका था और अब उसे  भूख भी लगने लगी थी .अब उसे एक आलमारी का खुला दरवाजा दिखा और उसने उसी मे अपना जाला बुनना शुरू  किया. कुछ जाला बुना ही था तभी उसे एक काक्रोच नजर आया जो जाले को अचरज भरे नजरो से देख रहा था.मकड़ी ने पूछा – ‘इस तरह क्यो देख रहे हो’काक्रोच बोला,” अरे यहाँ कहाँ जाला बुनने चली आयी ये तो बेकार की आलमारी है. अभी ये यहाँ पड़ी है कुछ दिनों बाद इसे बेच दिया जायेगा और तुम्हारी सारी मेहनत बेकार चली जायेगी. यह सुन कर मकड़ी ने वहां से हट जाना ही बेहतर समझा .बारबार प्रयास करने से वह काफी थक चुकी थी और उसके अंदर जाला बुनने की ताकत ही नही बची थी. भूख की वजह से वह परेशान थी. उसे पछतावा हो रहा था कि अगर पहले ही जाला बुन लेती तो अच्छा रहता. पर अब वह कुछ नहीं कर सकती थी उसी हालत मे पड़ी रही.जब मकड़ी को लगा कि अब कुछ नहीं हो सकता है तो उसने पास से गुजर रही चींटी से मदद करने का आग्रह किया .चींटी बोली, ” मैं बहुत देर से तुम्हे देख रही थी , तुम बार बार अपना काम शुरू करती और दूसरों के कहने पर उसे अधूरा छोड़ देती . और जो लोग ऐसा करते हैं , उनकी यही हालत होती है.” और ऐसा कहते हुए वह अपने रास्ते चली गई और मकड़ी पछताती हुई निढाल पड़ी रही.दोस्तों , हमारी ज़िन्दगी मे भी कई बार कुछ ऐसा ही होता है. हम कोई काम start करते है. शुरू शुरू मे तो हम उस काम के लिये बड़े उत्साहित  रहते है पर लोगो के comments की वजह से उत्साह कम होने लगता है और हम अपना काम बीच मे ही छोड़ देते है और जब बाद मे पता चलता है कि हम अपने सफलता के कितने नजदीक थे तो बाद मे पछतावे के अलावा कुछ नही बचता.

  • प्रेरणादायक कहानियां : तितली का संघर्ष : Titli ka sangharsh
    2 min 33 sec

    तितली का संघर्ष  एक बार एक आदमी को अपने garden में टहलते हुए किसी टहनी से लटकता हुआ एक तितली का कोकून दिखाई पड़ा. अब हर रोज़ वो आदमी उसे देखने लगा , और एक दिन उसने notice किया कि उस कोकून में एक छोटा सा छेद बन गया है. उस दिन वो वहीँ बैठ गया और घंटो उसे देखता रहा. उसने देखा की तितली उस खोल से बाहर निकलने की बहुत कोशिश कर रही है , पर बहुत देर तक प्रयास करने के बाद भी वो उस छेद से नहीं निकल पायी , और फिर वो बिलकुल शांत हो गयी मानो उसने हार मान ली हो.इसलिए उस आदमी ने निश्चय किया कि वो उस तितली की मदद करेगा. उसने एक कैंची उठायी और कोकून की opening को इतना बड़ा कर दिया की वो तितली आसानी से बाहर निकल सके. और यही हुआ, तितली बिना किसी और संघर्ष के आसानी से बाहर निकल आई, पर उसका शरीर सूजा हुआ था,और पंख सूखे हुए थे.वो आदमी तितली को ये सोच कर देखता रहा कि वो किसी भी वक़्त अपने पंख फैला कर उड़ने लगेगी, पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. इसके उलट बेचारी तितली कभी उड़ ही नहीं पाई और उसे अपनी बाकी की ज़िन्दगी इधरउधर घिसटते हुए बीतानी पड़ी.वो आदमी अपनी दया और जल्दबाजी में ये नहीं समझ पाया की दरअसल कोकून से निकलने की प्रक्रिया को प्रकृति ने इतना कठिन इसलिए बनाया है ताकि ऐसा करने से तितली के शरीर में मौजूद तरल उसके पंखों में पहुच सके और  वो छेद से बाहर निकलते ही उड़ सके.वास्तव में कभीकभी हमारे जीवन में संघर्ष ही वो चीज होती जिसकी हमें सचमुच आवश्यकता होती है. यदि हम बिना किसी struggle के सब कुछ पाने लगे तो हम भी एक अपंग के सामान हो जायेंगे. बिना परिश्रम और संघर्ष के हम कभी उतने मजबूत नहीं बन सकते जितना हमारी क्षमता है. इसलिए जीवन में आने वाले कठिन पलों को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखिये वो आपको कुछ ऐसा सीखा जायंगे जो आपकी ज़िन्दगी की उड़ान को possible बना पायेंगे.

  • प्रेरणादायक कहानियां : लकड़ी का कटोरा : Lakdi ka katora
    3 min 1 sec

    लकड़ी का कटोराएक वृद्ध व्यक्ति अपने बहु – बेटे के यहाँ शहर रहने गया। उम्र के इस पड़ाव पर वह अत्यंत कमजोर हो चुका था, उसके हाथ कांपते थे और दिखाई भी कम देता था। वो एक छोटे से घर में रहते थे, पूरा परिवार और उसका चार वर्षीया पोता एक साथ डिनर टेबल पर खाना खाते थे। लेकिन वृद्ध होने के कारण उस व्यक्ति को खाने में बड़ी दिक्कत होती थी। कभी मटर के दाने उसकी चम्मच से निकल कर फर्श पे बिखर जाते तो कभी हाँथ से दूध छलक कर मेजपोश पर गिर जाता।बहु बेटे एक दो दिन ये सब सहन करते रहे पर अब उन्हें अपने पिता की इस काम से चिढ होने लगी।“हमें इनका कुछ करना पड़ेगा ”, लड़के ने कहा।बहु ने भी हाँ में हाँ मिलाई और बोली, “आखिर कब तक हम इनकी वजह से अपने खाने का मजा किरकिरा करते रहेंगे, और हम इस तरह चीजों का नुक्सान होते हुए भी नहीं देख सकते।”अगले दिन जब खाने का वक़्त हुआ तो बेटे ने एक पुरानी मेज को कमरे के कोने में लगा दिया, अब बूढ़े पिता को वहीँ अकेले बैठ कर अपना भोजन करना था। यहाँ तक कि उनके खाने के बर्तनों की जगह एक लकड़ी का कटोरा दे दिया गया था, ताकि अब और बर्तन ना टूटफूट सकें।बाकी लोग पहले की तरह ही आराम से बैठ कर खाते और जब कभी कभार उस बुजुर्ग की तरफ देखते तो उनकी आँखों में आंसू दिखाई देते। यह देखकर भी बहुबेटे का मन नहीं पिघलता,वो उनकी छोटी से छोटी गलती पर ढेरों बातें सुना देते। वहां बैठा बालक भी यह सब बड़े ध्यान से देखता रहता, और अपने में मस्त रहता।एक रात खाने से पहले, उस छोटे बालक को उसके माता पिता ने ज़मीन पर बैठ कर कुछ करते हुए देखा, “तुम क्या बना रहे हो ” पिता ने पूछा,बच्चे ने मासूमियत के साथ उत्तर दियाअरे मैं तो आप लोगों के लिए एक लकड़ी का कटोरा बना रहा हूँ, ताकि जब मैं बड़ा हो जाऊं तो आप लोग इसमें खा सकें।और वह पुनः अपने काम में लग गया। पर इस बात का उसके माता पिता पर बहुत गहरा असर हुआ, उनके मुंह से एक भी शब्द नहीं निकला और आँखों से आंसू बहने लगे। वो दोनों बिना बोले ही समझ चुके थे कि अब उन्हें क्या करना है। उस रात वो अपने बूढ़े पिता को वापस डिनर टेबल पर ले आये, और फिर कभी उनके साथ अभद्र व्यवहार नहीं किया।

  • प्रेरणादायक कहानियां : अवसर की पहचान : Avsar ki pahchaan
    1 min 53 sec

    प्रेरणादायक कहानियां : अवसर की पहचानMotivational Stories : Avsar ki pahchaanVoice : Charu Chhabra Prernadayak kahaniyan sangyatandon glass neeche rakh dijiye प्रेरणादायक कहानियां संज्ञाटंडन अवसर की पहचान : Avsar ki pahchaan

  • प्रेरणादायक कहानियां : भेड़ की खाल में भेड़िया : Bhed ki khal men bhediya
    4 min 12 sec

    भेड़ की खाल में भेड़िया बहुत समय पहले की बात है, एक चरवाहा था जिसके पास 10 भेड़े थीं। वह रोज उन्हें चराने ले जाता और शाम को बाड़े में डाल देता।सबकुछ ठीक चल रहा था कि एक सुबह जब चरवाहा भेडें निकाल रहा था तब उसने देखा कि बाड़े से एक भेड़ गायब है। चरवाहा इधरउधर देखने लगा, बाड़ा कहीं से टूटा नहीं था और कंटीले तारों की वजह से इस बात की भी कोई सम्भावना न थी कि बहार से कोई जंगली जानवर अन्दर आया हो और भेड़ उठाकर ले गया हो।चरवाहा बाकी बची भेड़ों की तरफ घूमा और पुछा, “ क्या तुम लोगों को पता है कि यहाँ से एक भेंड़ गायब कैसे हो गयी…क्या रात को यहाँ कुछ हुआ था”सभी भेड़ों ने ना में सर हिला दिया।उस दिन भेड़ों के चराने के बाद चरवाहे ने हमेशा की तरह भेड़ों को बाड़े में डाल दिया।अगली सुबह जब वो आया तो उसकी आँखें आश्चर्य से खुली रह गयीं, आज भी एक भेंड़ गायब थी और अब सिर्फ आठ भेडें ही बची थीं।इस बार भी चरवाहे को कुछ समझ नहीं आया कि भेड़ कहाँ गायब हो गयी। बाकी बची भेड़ों से पूछने पर भी कुछ पता नहीं चला। ऐसा लगातार होने लगा और रोज रात में एक भेंड़ गायब हो जाती। फिर एक दिन ऐसा आया कि बाड़े में बस दो ही भेंड़े बची थीं।चरवाहा भी बिलकुल निराश हो चुका था, मन ही मन वो इसे अपना दुर्भाग्य मान सबकुछ भगवान् पर छोड़ दिया था।आज भी वो उन दो भेड़ों के बाड़े में डालने के बाद मुड़ा।तभी पीछे से आवाज़  आई, “ रुकोरुको मुझे अकेला छोड़ कर मत जाओ वर्ना ये भेड़िया आज रात मुझे भी मार डालेगा”चरवाहा फ़ौरन पलटा और अपनी लाठी संभालते हुए बोला, “ भेड़िया कहाँ है भेड़िया”भेड़ इशारा करते हुए बोली, “ ये जो आपके सामने खड़ा है दरअसल भेड़ नहीं, भेड़ की खाल में भेड़िया है। जब पहली बार एक भेड़ गायब हुई थी तो मैं डर के मारे उस रात सोई नहीं थी। तब मैंने देखा कि आधी रात के बाद इसने अपनी खाल उतारी और बगल वाली भेड़ को मारकर खा गया।”भेड़िये ने अपना राज खुलता देख वहां से भागना चाहा, लेकिन चरवाहा चौकन्ना था और लाठी से ताबड़तोड़ वार कर उसे वहीँ ढेर कर दिया।चरवाहा पूरी कहानी समझ चुका था और वह क्रोध से लाल हो उठा, उसने भेड़ से चीखते हुए पूछा, “ जब तुम ये बात इतना पहले से जानती थी तो मुझे बताया क्यों नहीं”भेड़ शर्मिंदा होते हुए बोली, “ मैं उसके भयानक रूप को देख अन्दर से डरी हुई थी, मेरी सच बोलने की हिम्मत ही नहीं हुई, मैंने सोचा कि शायद एकदो भेड़ खाने के बाद ये अपने आप ही यहाँ से चला जाएगा पर बात बढ़तेबढ़ते मेरी जान पर आ गयी और अब अपनी जान बचाने का मेरे पास एक ही चारा था हिम्मत करके सच बोलना, इसलिए आज मैंने आपसे सबकुछ बता दिया…”चरवाहा बोला, “ तुमने ये कैसे सोच लिए कि एकदो भेड़ों को मारने के बाद वो भेड़िया यहाँ से चला जायेगा…भेड़िया तो भेड़िया होता है…वो अपनी प्रकृति नहीं बदल सकता जरा सोचो तुम्हारी चुप्पी ने कितने निर्दोष भेड़ो की जान ले ली। अगर तुमने पहले ही सच बोलने की हिम्मत दिखाई होती तो आज सब कुछ कितना अच्छा होता”दोस्तों, ज़िन्दगी में ऐसे कई मौके आते हैं जहाँ हमारी थोड़ी सी हिम्मत एक बड़ा फर्क डाल सकती है पर उस भेड़ की तरह हममें से ज्यादातर लोग तब तक चुप्पी मारकर बैठे रहते हैं जब तक मुसीबत अपने सर पे नहीं आ जाती। चलिए इस कहानी से प्रेरणा लेते हुए हम सही समय पर सच बोलने की हिम्मत दिखाएं और अपने देश को भ्रष्टाचार, आतंकवाद और बलात्कार जैसे भेड़ियों से मुक्त कराएं।

  • प्रेरणादायक कहानियां : संघर्ष के बीज : Sangharsh ke Beej
    3 min 6 sec

    Prernadayak kahaniyan sangyatandon Sangharsh ke Beej योगेशपाण्डे Yogesh Pande प्रेरणादायककहानियां संज्ञाटंडन संघर्षकेबीज 

  • प्रेरणादायक कहानियां : ज़िंदगी के पत्थर, कंकड़ और रेत : zindagi ke pathar, kankad aur ret
    2 min 54 sec

    ज़िन्दगी के पत्थर, कंकड़ और रेतPhilosophy के एक professor ने कुछ चीजों के साथ class में प्रवेश किया. जब class शुरू हुई तो उन्होंने एक बड़ा सा खाली शीशे का जार लिया और उसमे पत्थर के बड़ेबड़े टुकड़े भरने लगे. फिर उन्होंने students से पूछा कि क्या जार भर गया है और सभी ने कहा “हाँ”.तब प्रोफ़ेसर ने छोटेछोटे कंकडों से भरा एक box लिया और उन्हें जार में भरने लगे. जार को थोडा हिलाने पर ये कंकड़ पत्थरों के बीच settle हो गए. एक बार फिर उन्होंने छात्रों से पूछा कि क्या जार भर गया है  और सभी ने हाँ में उत्तर दिया.तभी professor ने एक sand box निकाला और उसमे भरी रेत को जार में डालने लगे. रेत ने बचीखुची जगह भी भर दी. और एक बार फिर उन्होंने पूछा कि क्या जार भर गया है और सभी ने एक साथ उत्तर दिया , ” हाँ”फिर professor ने समझाना शुरू किया, ” मैं चाहता हूँ कि आप इस बात को समझें कि ये जार आपकी life को represent करता है. बड़ेबड़े पत्थर आपके जीवन की ज़रूरी चीजें हैं आपकी family,आपका partner,आपकी health, आपके बच्चे – ऐसी चीजें कि अगर आपकी बाकी सारी चीजें खो भी जाएँ और सिर्फ ये रहे तो भी आपकी ज़िन्दगी पूर्ण रहेगी.ये कंकड़ कुछ अन्य चीजें हैं जो matter करती हैं जैसे कि आपकी job, आपका घर, इत्यादि.और ये रेत बाकी सभी छोटीमोटी चीजों को दर्शाती है.अगर आप जार को पहले रेत से भर देंगे तो कंकडों और पत्थरों के लिए कोई जगह नहीं बचेगी. यही आपकी life के साथ होता है. अगर आप अपनी सारा समय और उर्जा छोटीछोटी चीजों में लगा देंगे तो आपके पास कभी उन चीजों के लिए time नहीं होगा जो आपके लिए important हैं. उन चीजों पर ध्यान दीजिये जो आपकी happiness के लिए ज़रूरी हैं.बच्चों के साथ खेलिए, अपने partner के साथ dance कीजिये. काम पर जाने के लिए, घर साफ़ करने के लिए,party देने के लिए,  हमेशा वक़्त होगा. पर पहले पत्थरों पर ध्यान दीजिये – ऐसी चीजें जो सचमुच matter करती हैं . अपनी priorities set कीजिये. बाकी चीजें बस रेत हैं.”

  • प्रेरणादायक कहानियां : सफलता का रहस्य : Safalta ka Rahasy
    1 min 39 sec

    सफलता का रहस्य एक बार एक नौजवान लड़के ने सुकरात से पूछा कि सफलता का रहस्य क्या  हैसुकरात ने उस लड़के से कहा कि तुम कल मुझे नदी के किनारे मिलो. वो मिले. फिर सुकरात ने नौजवान से उनके साथ नदी की तरफ बढ़ने को कहा.और जब आगे बढ़तेबढ़ते पानी गले तक पहुँच गया, तभी अचानक सुकरात ने उस लड़के का सर पकड़ के पानी में डुबो दिया.लड़का बाहर निकलने के लिए संघर्ष करने लगा , लेकिन सुकरात ताकतवर थे और उसे तब तक डुबोये रखे जब तक की वो नीला नहीं पड़ने लगा. फिर सुकरात ने उसका सर पानी से बाहर निकाल दिया और बाहर निकलते ही जो चीज उस लड़के ने सबसे पहले की वो थी हाँफतेहाँफते तेजी से सांस लेना.सुकरात ने पूछा ,” जब तुम वहाँ थे तो तुम सबसे ज्यादा क्या चाहते थे”लड़के ने उत्तर दिया,”सांस लेना”सुकरात ने कहा,” यही सफलता का रहस्य है. जब तुम सफलता को उतनी ही बुरी तरह से चाहोगे जितना की तुम सांस लेना  चाहते थे  तो वो तुम्हे मिल जाएगी” इसके आलावा और कोई रहस्य नहीं है.

  • प्रेरणादायक कहानियां : आप हाथी नहीं इंसान हैं : Aap haathi nahi insaan hain
    2 min 16 sec

    आप हाथी नहीं इंसान हैं एक आदमी कहीं से गुजर रहा था, तभी उसने सड़क के किनारे बंधे हाथियों को देखा, और अचानक रुक गया. उसने देखा कि हाथियों के अगले पैर में एक रस्सी बंधी हुई है, उसे इस बात का बड़ा अचरज हुआ की हाथी जैसे विशालकाय जीव लोहे की जंजीरों की जगह बस एक छोटी सी रस्सी से बंधे हुए हैं ये स्पष्ठ था कि हाथी जब चाहते तब अपने बंधन तोड़ कर कहीं भी जा सकते थे, पर किसी वजह से वो ऐसा नहीं कर रहे थे.उसने पास खड़े महावत से पूछा कि भला ये हाथी किस प्रकार इतनी शांति से खड़े हैं और भागने का प्रयास नही कर रहे हैं तब महावत ने कहा, ” इन हाथियों को छोटे पर से ही इन रस्सियों से बाँधा जाता है, उस समय इनके पास इतनी शक्ति नहीं होती की इस बंधन को तोड़ सकें. बारबार प्रयास करने पर भी रस्सी ना तोड़ पाने के कारण उन्हें धीरेधीरे यकीन होता जाता है कि वो इन रस्सियों को नहीं तोड़ सकते,और बड़े होने पर भी उनका ये यकीन बना रहता है, इसलिए वो कभी इसे तोड़ने का प्रयास ही नहीं करते.”आदमी आश्चर्य में पड़ गया कि ये ताकतवर जानवर सिर्फ इसलिए अपना बंधन नहीं तोड़ सकते क्योंकि वो इस बात में यकीन करते हैंइन हाथियों की तरह ही हममें से कितने लोग सिर्फ पहले मिली असफलता के कारण ये मान बैठते हैं कि अब हमसे ये काम हो ही नहीं सकता और अपनी ही बनायीं हुई मानसिक जंजीरों में जकड़ेजकड़े पूरा जीवन गुजार देते हैं.याद रखिये असफलता जीवन का एक हिस्सा है ,और निरंतर प्रयास करने से ही सफलता मिलती है. यदि आप भी ऐसे किसी बंधन में बंधें हैं जो आपको अपने सपने सच करने से रोक रहा है तो उसे तोड़ डालिए….. आप हाथी नहीं इंसान हैं.

  • प्रेरणादायक कहानियां : मेरी ताकत: Meri Taqat
    7 min 18 sec

    मेरी ताकत जापान  के  एक  छोटे  से  कसबे में  रहने  वाले  दस  वर्षीय  ओकायो  को  जूडो  सीखने  का  बहुत  शौक  था . पर  बचपन  में  हुई  एक  दुर्घटना  में  बायाँ  हाथ  कट  जाने  के  कारण  उसके  माता पिता  उसे  जूडो सीखने  की  आज्ञा  नहीं  देते  थे . पर  अब  वो  बड़ा  हो  रहा  था  और  उसकी  जिद्द  भी  बढती  जा  रही  थी . अंततः  माता पिता  को  झुकना  ही  पड़ा  और  वो  ओकायो  को  नजदीकी  शहर  के  एक  मशहूर मार्शल आर्ट्स   गुरु  के  यहाँ  दाखिला  दिलाने ले  गए .गुरु  ने  जब  ओकायो  को  देखा  तो  उन्हें  अचरज  हुआ   कि ,  बिना  बाएँ  हाथ  का  यह  लड़का  भला   जूडो   क्यों  सीखना  चाहता   है उन्होंने  पूछा , “ तुम्हारा  तो  बायाँ   हाथ  ही  नहीं  है  तो  भला  तुम  और  लड़कों  का  मुकाबला  कैसे  करोगे .”“ ये  बताना  तो  आपका  काम  है” ,ओकायो  ने  कहा . मैं  तो  बस  इतना  जानता  हूँ  कि  मुझे  सभी  को  हराना  है  और  एक  दिन  खुद  “सेंसेई” मास्टर बनना  है ”गुरु  उसकी  सीखने  की  दृढ  इच्छा  शक्ति  से  काफी  प्रभावित  हुए  और  बोले , “ ठीक  है  मैं  तुम्हे  सीखाऊंगा  लेकिन  एक  शर्त  है , तुम  मेरे  हर  एक  निर्देश  का  पालन  करोगे  और  उसमे  दृढ  विश्वास  रखोगे .”ओकायो  ने  सहमती  में  गुरु  के  समक्ष  अपना  सर  झुका  दिया .गुरु  ने एक  साथ लगभग  पचास छात्रों  को  जूडो  सीखना  शुरू  किया . ओकायो  भी  अन्य  लड़कों  की  तरह  सीख  रहा  था . पर  कुछ  दिनों  बाद  उसने  ध्यान  दिया  कि  गुरु  जी  अन्य  लड़कों  को  अलग अलग  दांव पेंच  सीखा  रहे  हैं  लेकिन  वह  अभी  भी  उसी  एक  किक  का  अभ्यास  कर  रहा  है  जो  उसने  शुरू  में  सीखी  थी . उससे  रहा  नहीं  गया  और  उसने  गुरु  से  पूछा , “ गुरु  जी  आप  अन्य  लड़कों  को  नयी नयी  चीजें  सीखा  रहे  हैं , पर  मैं  अभी  भी  बस  वही  एक  किक  मारने  का  अभ्यास  कर  रहा  हूँ . क्या  मुझे  और  चीजें  नहीं  सीखनी  चाहियें  ”गुरु  जी  बोले , “ तुम्हे  बस  इसी  एक  किक  पर  महारथ  हांसिल  करने  की  आवश्यकता  है ”   और वो आगे बढ़ गए.ओकायो  को  विस्मय हुआ  पर  उसे  अपने  गुरु  में  पूर्ण  विश्वास  था  और  वह  फिर  अभ्यास  में  जुट  गया .समय  बीतता  गया  और  देखते देखते  दो  साल  गुजर  गए , पर  ओकायो  उसी  एक  किक  का  अभ्यास  कर  रहा  था . एक  बार  फिर  ओकायो को चिंता होने लगी और उसने  गुरु  से  कहा  , “ क्या  अभी  भी  मैं  बस  यही  करता  रहूँगा  और बाकी सभी  नयी तकनीकों  में  पारंगत  होते  रहेंगे ”गुरु  जी  बोले , “ तुम्हे  मुझमे  यकीन  है  तो  अभ्यास  जारी  रखो ”ओकायो ने गुरु कि आज्ञा का पालन करते हुए  बिना कोई प्रश्न  पूछे अगले  6 साल  तक  उसी  एक  किक  का  अभ्यास  जारी  रखा .सभी को जूडो  सीखते आठ साल हो चुके थे कि तभी एक  दिन  गुरु जी ने सभी शिष्यों को बुलाया और बोले ” मुझे आपको जो ज्ञान देना था वो मैं दे चुका हूँ और अब गुरुकुल  की परंपरा  के  अनुसार सबसे  अच्छे  शिष्य  का  चुनाव  एक प्रतिस्पर्धा के  माध्यम  से किया जायेगा  और जो इसमें विजयी होने वाले शिष्य को  “सेंसेई” की उपाधि से सम्मानित किया जाएगा.”प्रतिस्पर्धा आरम्भ हुई.गुरु जी ओकायो  को  उसके  पहले  मैच में हिस्सा लेने के लिए आवाज़ दी .ओकायो ने लड़ना शुर किया और खुद  को  आश्चर्यचकित  करते  हुए  उसने  अपने  पहले  दो  मैच  बड़ी  आसानी  से  जीत  लिए . तीसरा मैच  थोडा कठिन  था , लेकिन  कुछ  संघर्ष  के  बाद  विरोधी  ने  कुछ  क्षणों  के  लिए  अपना  ध्यान उस पर से हटा दिया , ओकायो  को  तो  मानो  इसी  मौके  का  इंतज़ार  था  , उसने  अपनी  अचूक  किक  विरोधी  के  ऊपर  जमा  दी  और  मैच  अपने  नाम  कर  लिया . अभी  भी  अपनी  सफलता  से  आश्चर्य  में  पड़े  ओकयो  ने  फाइनल  में  अपनी  जगह  बना  ली .इस  बार  विरोधी  कहीं अधिक  ताकतवर, अनुभवी  और विशाल   था . देखकर  ऐसा  लगता  था  कि  ओकायो उसके  सामने एक मिनट भी  टिक नहीं  पायेगा .मैच  शुरू  हुआ  , विरोधी  ओकायो  पर  भारी  पड़ रहा  था , रेफरी  ने  मैच  रोक  कर  विरोधी  को  विजेता  घोषित  करने  का  प्रस्ताव  रखा , लेकिन  तभी  गुरु  जी  ने  उसे रोकते हुए कहा , “ नहीं , मैच  पूरा  चलेगा ”मैच  फिर  से  शुरू  हुआ .विरोधी  अतिआत्मविश्वास  से  भरा  हुआ   था  और  अब  ओकायो  को कम आंक रहा था . और इसी  दंभ  में  उसने  एक  भारी  गलती  कर  दी , उसने  अपना  गार्ड  छोड़  दिया ओकयो  ने इसका फायदा उठाते हुए आठ  साल  तक  जिस  किक  की प्रैक्टिस  की  थी  उसे  पूरी  ताकत  और सटीकता  के  साथ  विरोधी  के  ऊपर  जड़  दी  और  उसे  ज़मीन पर  धराशाई  कर  दिया . उस  किक  में  इतनी शक्ति  थी  की  विरोधी  वहीँ  मुर्छित  हो  गया  और  ओकायो  को  विजेता  घोषित  कर  दिया  गया .मैच  जीतने  के  बाद  ओकायो  ने  गुरु  से  पूछा  ,” सेंसेई , भला  मैंने  यह प्रतियोगिता  सिर्फ  एक  मूव  सीख  कर  कैसे  जीत  ली ”“ तुम  दो  वजहों  से  जीते ,”  गुरु जी  ने  उत्तर  दिया . “ पहला , तुम  ने जूडो  की  एक  सबसे  कठिन  किक  पर  अपनी इतनी  मास्टरी  कर  ली कि  शायद  ही  इस  दुनिया  में  कोई  और  यह  किक  इतनी  दक्षता   से  मार  पाए , और  दूसरा  कि  इस  किक  से  बचने  का  एक  ही  उपाय  है  , और  वह  है  वोरोधी   के  बाएँ  हाथ  को  पकड़कर  उसे  ज़मीन  पर  गिराना .”ओकायो  समझ चुका था कि आज उसकी  सबसे  बड़ी  कमजोरी  ही  उसकी  सबसे  बड़ी  ताकत बन  चुकी  थी .मित्रों human being होने का मतलब ही है imperfect होना. Imperfection अपने आप में बुरी नहीं होती, बुरा होता है हमारा उससे deal करने का तरीका. अगर ओकायो चाहता तो अपने बाएँ हाथ के ना होने का रोना रोकर एक अपाहिज की तरह जीवन बिता सकता था, लेकिन उसने इस वजह से कभी खुद को हीन नहीं महसूस होने दिया. उसमे  अपने सपने को साकार करने की दृढ इच्छा थी और यकीन जानिये जिसके अन्दर यह इच्छा होती है भगवान उसकी मदद के लिए कोई ना कोई गुरु भेज देता है, ऐसा गुरु जो उसकी सबसे बड़ी कमजोरी को ही उसकी सबसे बड़ी ताकत बना उसके सपने साकार कर सकता है.

  • प्रेरणादायक कहानियां : सबसे कीमती तोहफा Sabse kimti Tohfa
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  • प्रेरणादायक कहानियां ;बड़ा काम छोटा काम bada kaam chota kaam
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  • प्रेरणादायक कहानियां : बीज Beej
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  • प्रेरणादायक कहानियां : भगवान बचाएगा bhagwaan bachayega
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  • प्रेरणादायक कहानियां : महातमा जी की बिल्ली Mahatma ji ki billi
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  • प्रेरणादायक कहानियां : मंदिर का पुजारी Mandir ka pujari
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  • प्रेरणादायक कहानियां : घमंडी कौवा ghamandi kawwa
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  • प्रेरणादायक कहानियां : बुरी आदत buri aadat
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  • प्रेरणादायक कहानियां : बड़ा बनने के लिए बड़ा सोचो Bada banne ke liye bada socho
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  • प्रेरणादायक कहानियां : किसान और चट्टान Kisaan aur Chattan
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  • प्रेरणादायक कहानियां : संगति का असर Sangati ka asar
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  • प्रेरणादायक कहानियां : जीवन की डोर : Jeevan kee dor
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    Prernadayak kahaniyan sangyatandon Jeevan kee dor योगेश पाण्डे Yogesh Pande प्रेरणादायक कहानियां संज्ञाटंडन जीवनकीडोर 

  • प्रेरणादायक कहानियां : कुएँ का मेंढक : Kuen ka mendhak
    4 min 20 sec

    प्रेरणादायक कहानियां : कुएँ का मेंढक Motivational Stories : Kuen ka mendhakVoice : Yogesh Pande Prernadayak kahaniyan sangyatandon glass neeche rakh dijiye प्रेरणादायक कहानियां संज्ञाटंडन योगेश पांडे कुएँ का मेंढक : Kuen ka mendhak

  • प्रेरणादायक कहानियां : बाज़ की उड़ान : Baaz ki udaan
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    बाज की उड़ान एक बार की बात है कि एक बाज का अंडा मुर्गी के अण्डों के बीच आ गया. कुछ दिनों  बाद उन अण्डों में से चूजे निकले, बाज का बच्चा भी उनमे से एक था.वो उन्ही के बीच बड़ा होने लगा. वो वही करता जो बाकी चूजे करते, मिटटी में इधरउधर खेलता, दाना चुगता और दिन भर उन्हीकी तरह चूँचूँ करता. बाकी चूजों की तरह वो भी बस थोडा सा ही ऊपर उड़ पाता , और पंख फड़फडाते हुए नीचे आ जाता . फिर एक दिन उसने एक बाज को खुले आकाश में उड़ते हुए देखा, बाज बड़े शान से बेधड़क उड़ रहा था. तब उसने बाकी चूजों से पूछा, कि” इतनी उचाई पर उड़ने वाला वो शानदार पक्षी कौन है”तब चूजों ने कहा” अरे वो बाज है, पक्षियों का राजा, वो बहुत ही ताकतवर और विशाल है , लेकिन तुम उसकी तरह नहीं उड़ सकते क्योंकि तुम तो एक चूजे हो”बाज के बच्चे ने इसे सच मान लिया और कभी वैसा बनने की कोशिश नहीं की. वो ज़िन्दगी भर चूजों की तरह रहा, और एक दिन बिना अपनी असली ताकत पहचाने ही मर गया. दोस्तों , हममें से बहुत से लोग  उस बाज की तरह ही अपना असली potential जाने बिना एक secondclass ज़िन्दगी जीते रहते हैं, हमारे आसपास की mediocrity हमें भी mediocre बना देती है.हम में ये भूल जाते हैं कि हम आपार संभावनाओं से पूर्ण एक प्राणी हैं. हमारे लिए इस जग में कुछ भी असंभव नहीं है,पर फिर भी बस एक औसत जीवन जी के हम इतने बड़े मौके को गँवा देते हैं.आप चूजों  की तरह मत बनिए , अपने आप पर ,अपनी काबिलियत पर भरोसा कीजिए. आप चाहे जहाँ हों, जिस परिवेश में हों, अपनी क्षमताओं को पहचानिए और आकाश की ऊँचाइयों पर उड़ कर  दिखाइए  क्योंकि यही आपकी वास्तविकता है.

  • प्रेरणादायक कहानियां : दर्जी की सीख : Darzi ki seekh
    1 min 37 sec

    दर्जी की सीखएक दिन स्कूल में छुट्टी की घोषणा होने के कारण, एक दर्जी का बेटा, अपने पापा की दुकान पर चला गया ।वहाँ जाकर वह बड़े ध्यान से अपने पापा को काम करते हुए देखने लगा । उसने देखा कि उसके पापा कैंची से कपड़े को काटते हैं और कैंची को पैर के पास टांग से दबा कर रख देते हैं । फिर सुई से उसको सीते हैं और सीने के बाद सु ई को अपनी टोपी पर लगा लेते हैं ।जब उसने इसी क्रिया को चारपाँच बार देखा तो उससे रहा नहीं गया, तो उसने अपने पापा से कहा कि वह एक बात उनसे पूछना चाहता है पापा ने कहा बेटा बोलो क्या पूछना चाहते हो बेटा बोला पापा मैं बड़ी देर से आपको देख रहा हूं , आप जब भी कपड़ा काटते हैं, उसके बाद कैंची को पैर के नीचे दबा देते हैं, और सुई से कपड़ा सीने के बाद, उसे टोपी पर लगा लेते हैं, ऐसा क्यों इसका जो उत्तर पापा ने दिया उन दो पंक्तियाँ में मानों उसने ज़िन्दगी का सार समझा दिया ।उत्तर था ” बेटा, कैंची काटने का काम करती है, और सुई जोड़ने का काम करती है, और काटने वाले की जगह हमेशा नीची होती है परन्तु जोड़ने वाले की जगह हमेशा ऊपर होती है। यही कारण है कि मैं सुई को टोपी पर लगाता हूं और कैंची को पैर के नीचे रखता हूं ।”

  • प्रेरणादायक कहानियां : पुरानी पेंटिंग : Purani Painting
    2 min 32 sec

    पुरानी पेंटिंगबहुत समय पहले की बात है ,उन्नीसवीं सदी के मशहूर पेंटर दांते गेब्रियल रोजेटी के पास एक अधेड़ उम्र का व्यक्ति पहुंचा. उसके पास कुछ स्केच और  ड्राइंगस  थीं जो वो रोजेटी को दिखा कर उनकी राय जानना चाहता था की वे अच्छी हैं , या कम से कम उन्हें देखकर कलाकार में कुछ टैलेंट जान पड़ता है .रोजेटी ने ध्यान से उन  ड्राइंगस को देखा . वह जल्द ही समझा गए कि वे किसी काम की नहीं हैं , और उसे बनाने वाले के नहीं के बराबर आर्टिस्टिक टैलेंट है . वे उसे व्यक्ति को दुखी नहीं करना चाहते थे पर साथ ही वो झूठ भी नहीं बोल सकते थे इसलिए उन्होंने बड़ी सज्जनता से उससे  कह दिया कि इन ड्राइंगस में कोई खास बात नहीं है. उनकी बात  सुनकर व्यक्ति थोडा निराश हुआ , लेकिन शायद वो पहले से ही ऎसी उम्मीद कर रहा था.उसने रोजेटी से उनका समय लेने के लिए माफ़ी मांगी , और अनुरोध किया कि यदि संभव हो तो वे एक यंग आर्ट स्टूडेंट के द्वारा बनायीं कुछ पुरानी पेंटिंगस भी देख लें. रोजेटी तुरंत तैयार हो गये, और एक पुरानी फ़ाइल में लगी कृतियाँ देखने लगे .उन्होंने अपनी ख़ुशी जाहिर करते हुए कहा , ” वाह, ये पेंटिंगस तो बड़ी अच्छी हैं , इस नौजावान में बहुत टैलेंट है , उसे हर तरह का प्रोत्साहन दीजिये, यदि वह इस काम लगा रहता है और जी तोड़ मेहनत करता है तो कोई शक नहीं कि एक दिन वो माहन पेंटर बनेगा.”रोजेटी की बात सुनकर उस व्यक्ति की आँखें भर आयीं .” कौन है यह नौजवान ” , रोजेटी ने पूछा , “तुम्हारा बेटा ”“नहीं”, ” ये मैं ही हूँ तीस  साल पहले का मैं काश उस समय किसी ने आपकी तरह प्रोत्साहित किया होता तो आज मैं पछताने की जगह एक खुशहाल ज़िन्दगी जी रहा होता.”Friends , encouragement एक ऐसी चीज है जो हमारे अन्दर का बेस्ट बाहर लेकर आती है , हमें और भी अच्छा करने के लिए मोटीवेट करती है. AKC को ही ले लें, तो अगर मैं अब तक हज़ारों लोगों से मिले हज़ारों कमेंट्स को minus कर दूँ तो शायद ये साईट आज जितनी है उसकी आधी भी नहीं होती और लोग क्या करते हैं इस पर हम control नहीं कर सकते पर हम ये निश्चय कर सकते हैं कि जब कभी हमें किसी को genuinely encourage करने का मौका मिले हम उसे ज़रूर encourage करें .

  • प्रेरणादायक कहानियां : अपना अपना नज़रिया : apna apna nazariya
    3 min 17 sec

    Prernadayak kahaniyan sangyatandon apna apna nazariya योगेश पाण्डे Yogesh Pande प्रेरणादायक कहानियां संज्ञाटंडन अपनाअपनानज़रिया 

  • प्रेरणादायक कहानियां : लल्लू को सबक : Lallu ko sabak
    2 min 35 sec

    Prernadayak kahaniyan sangyatandon Lallu ko sabak योगेश पाण्डे Yogesh Pande प्रेरणादायक कहानियां संज्ञाटंडन लल्लू को सबक

  • प्रेरणादायक कहानियां : बाड़े की कील : Baade kee Keel
    2 min 9 sec

    बाड़े की कील बहुत समय पहले की बात है, एक गाँव में एक लड़का रहता था. वह बहुत ही गुस्सैल था, छोटीछोटी बात पर अपना आप खो बैठता और लोगों को भलाबुरा कह देता. उसकी इस आदत से परेशान होकर एक दिन उसके पिता ने उसे कीलों से भरा हुआ एक थैला दिया और कहा कि , ” अब जब भी तुम्हे गुस्सा आये तो तुम इस थैले में से एक कील निकालना और बाड़े में ठोक देना.”पहले दिन उस लड़के को चालीस बार गुस्सा किया और इतनी ही कीलें बाड़े में ठोंक दी.पर  धीरेधीरे कीलों  की संख्या घटने लगी,उसे लगने लगा की कीलें ठोंकने में इतनी मेहनत करने से अच्छा है कि अपने क्रोध पर काबू किया जाए और अगले कुछ हफ्तों में उसने अपने गुस्से पर बहुत हद्द तक  काबू करना सीख लिया. और फिर एक दिन ऐसा आया कि उस लड़के ने पूरे दिन में एक बार भी अपना temper नहीं loose किया.जब उसने अपने पिता को ये बात बताई तो उन्होंने ने फिर उसे एक काम दे दिया, उन्होंने कहा कि ,” अब हर उस दिन जिस दिन तुम एक बार भी गुस्सा ना करो इस बाड़े से एक कील निकाल निकाल देना.”लड़के ने ऐसा ही किया, और बहुत समय बाद वो दिन भी आ गया जब लड़के ने बाड़े में लगी आखिरी कील भी निकाल दी, और अपने पिता को ख़ुशी से ये बात बतायी.तब पिताजी उसका हाथ पकड़कर उस बाड़े के पास ले गए, और बोले, ” बेटे तुमने बहुत अच्छा काम किया है, लेकिन क्या तुम बाड़े में हुए छेदों को देख पा रहे हो. अब वो बाड़ा कभी भी वैसा नहीं बन सकता जैसा वो पहले था.जब तुम क्रोध में कुछ कहते हो तो वो शब्द भी इसी तरह सामने वाले व्यक्ति पर गहरे घाव छोड़ जाते हैं.”इसलिए अगली बार अपना temper loose करने से पहले सोचिये कि क्या आप भी उस बाड़े में और कीलें ठोकना चाहते हैं

  • प्रेरणादायक कहानियां : बदलाव : Badlaav
    2 min 52 sec

    Prernadayak kahaniyan sangyatandon Badlaav Shubra Thakur प्रेरणादायक कहानियां संज्ञाटंडन बदलाव शुभ्रा ठाकुर

  • प्रेरणादायक कहानियां : गुरु दक्षिणा : Guru Dakshina
    5 min 44 sec

    गुरु दक्षिणाएक बार एक शिष्य ने विनम्रतापूर्वक अपने गुरु जी से पूछा ‘गुरु जी,कुछ लोग कहते हैं कि  जीवन एक संघर्ष है, कुछ अन्य कहते हैं कि जीवन एक खेल है और कुछ जीवन को एक उत्सव की संज्ञा देते हैं इनमें कौन सही है’गुरु जी ने तत्काल बड़े ही धैर्यपूर्वक उत्तर दियापुत्र,जिन्हें गुरु नहीं मिला उनके लिए जीवन एक संघर्ष है जिन्हें गुरु मिल गया उनका जीवन एक खेल है और जो लोग गुरु द्वारा बताये गए मार्ग पर चलने लगते हैं, मात्र वे ही जीवन को एक उत्सव का नाम देने का साहस जुटा पाते हैंयह उत्तर सुनने के बाद भी शिष्य पूरी तरह से संतुष्ट न था गुरु जी को इसका आभास हो गया वे कहने लगे‘लो, तुम्हें इसी सन्दर्भ में एक कहानी सुनाता हूँध्यान से सुनोगे तो स्वयं ही अपने प्रश्न का उत्तर पा सकोगे ’उन्होंने जो कहानी सुनाई,वह इस प्रकार थीएक बार की बात है कि किसी गुरुकुल में तीन शिष्यों नें अपना अध्ययन सम्पूर्ण करने पर अपने गुरु जी से यह बताने के लिए विनती की कि उन्हें गुरुदाक्षिणा में, उनसे क्या चाहिए गुरु जी पहले तो मंदमंद मुस्कराये और फिर बड़े स्नेहपूर्वक कहने लगे‘मुझे तुमसे गुरुदक्षिणा में एक थैला भर के सूखी पत्तियां चाहिए, ला सकोगे’ वे तीनों मन ही मन बहुत प्रसन्न हुए क्योंकि उन्हें लगा कि वे बड़ी आसानी से अपने गुरु जी की इच्छा पूरी कर सकेंगे सूखी पत्तियाँ तो जंगल में सर्वत्र बिखरी ही रहती हैं वे उत्साहपूर्वक एक ही स्वर में बोले‘जी गुरु जी, जैसी आपकी आज्ञा ’अब वे तीनों शिष्य चलतेचलते एक समीपस्थ जंगल में पहुँच चुके थे लेकिन यह देखकर कि वहाँ पर तो सूखी पत्तियाँ केवल एक मुट्ठी भर ही थीं ,उनके आश्चर्य का ठिकाना न रहा वे सोच में पड़ गये कि आखिर जंगल से कौन सूखी पत्तियां उठा कर ले गया होगा इतने में ही उन्हें दूर से आता हुआ कोई किसान दिखाई दिया वे उसके पास पहुँच कर, उससे विनम्रतापूर्वक याचना करने लगे कि वह उन्हें केवल एक थैला भर सूखी पत्तियां दे दे अब उस किसान ने उनसे क्षमायाचना करते हुए, उन्हें यह बताया कि वह उनकी मदद नहीं कर सकता क्योंकि उसने सूखी पत्तियों का ईंधन के रूप में पहले ही उपयोग कर लिया था अब, वे तीनों, पास में ही बसे एक गाँव की ओर इस आशा से बढ़ने लगे थे कि हो सकता है वहाँ उस गाँव में उनकी कोई सहायता कर सके वहाँ पहुँच कर उन्होंने जब एक व्यापारी को देखा तो बड़ी उम्मीद से उससे एक थैला भर सूखी पत्तियां देने के लिए प्रार्थना करने लगे लेकिन उन्हें फिर से एकबार निराशा ही हाथ आई क्योंकि उस व्यापारी ने तो, पहले ही, कुछ पैसे कमाने के लिए सूखी पत्तियों के दोने बनाकर बेच दिए थे लेकिन उस व्यापारी ने उदारता दिखाते हुए उन्हें एक बूढी माँ का पता बताया जो सूखी पत्तियां एकत्रित किया करती थीपर भाग्य ने यहाँ पर भी उनका साथ  नहीं  दिया क्योंकि वह बूढी माँ तो उन पत्तियों को अलगअलग करके कई प्रकार की ओषधियाँ बनाया करती थी अब निराश होकर वे तीनों खाली हाथ ही गुरुकुल लौट गये गुरु जी ने उन्हें देखते ही स्नेहपूर्वक पूछा ‘पुत्रो,ले आये गुरुदक्षिणा ’तीनों ने सर झुका लिया गुरू जी द्वारा दोबारा पूछे जाने पर उनमें से एक शिष्य कहने लगा ‘गुरुदेव,हम आपकी इच्छा पूरी नहीं कर पाये हमने सोचा था कि सूखी पत्तियां तो जंगल में सर्वत्र बिखरी ही रहती होंगी लेकिन बड़े ही आश्चर्य की बात है कि लोग उनका भी कितनी तरह से उपयोग करते हैं’गुरु जी फिर पहले ही की तरह मुस्कराते हुए प्रेमपूर्वक बोले ‘निराश क्यों होते हो प्रसन्न हो जाओ और यही ज्ञान कि सूखी पत्तियां भी व्यर्थ नहीं हुआ करतीं बल्कि उनके भी अनेक उपयोग हुआ करते हैं मुझे गुरुदक्षिणा के रूप में दे दो ’तीनों शिष्य गुरु जी को प्रणाम करके खुशीखुशी अपनेअपने घर की ओर चले गये वह शिष्य जो गुरु जी की कहानी एकाग्रचित्त हो कर सुन रहा था,अचानक बड़े उत्साह से बोला‘गुरु जी,अब मुझे अच्छी तरह से ज्ञात हो गया है कि आप क्या कहना चाहते हैं आप का  संकेत, वस्तुतः इसी ओर है न कि जब सर्वत्र सुलभ सूखी पत्तियां भी निरर्थक या बेकार नहीं होती हैं तो फिर हम कैसे, किसी भी वस्तु या व्यक्ति को छोटा और महत्त्वहीन मान कर उसका तिरस्कार कर सकते हैं चींटी से लेकर हाथी तक और सुई से लेकर तलवार तकसभी का अपनाअपना महत्त्व होता है गुरु जी भी तुरंत ही बोले‘हाँ, पुत्र,मेरे कहने का भी यही तात्पर्य है कि हम जब भी किसी से मिलें तो उसे यथायोग्य मान देने का भरसक प्रयास करें ताकि आपस में स्नेह, सद्भावना,सहानुभूति एवं सहिष्णुता का विस्तार होता रहे और हमारा जीवन संघर्ष के बजाय उत्सव बन सके दूसरे,यदि जीवन को एक खेल ही माना जाए तो बेहतर यही होगा कि हम  निर्विक्षेप,स्वस्थ एवं शांत प्रतियोगिता में ही भाग लें और अपने निष्पादन तथा निर्माण को ऊंचाई के शिखर पर ले जाने का अथक प्रयास करें ’अब शिष्य पूरी तरह से संतुष्ट था अंततः,मैं यही कहना चाहती हूँ कि यदि हम मन, वचन और कर्म इन तीनों ही स्तरों पर इस कहानी का मूल्यांकन करें, तो भी यह कहानी खरी ही उतरेगी सब के प्रति पूर्वाग्रह से मुक्त मन वाला व्यक्ति अपने वचनों से कभी भी किसी को आहत करने का दुःसाहस नहीं करता और उसकी यही ऊर्जा उसके पुरुषार्थ के मार्ग की समस्त बाधाओं को हर लेती है वस्तुतः,हमारे जीवन का सबसे बड़ा ‘उत्सव’ पुरुषार्थ ही होता हैऐसा विद्वानों का मत है

  • प्रेरणादायक कहानियां : नागरिक का फर्ज़ Nagrik ka farz
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  • बंदर और सुगरी Bander aur Sugri
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  • प्रेरणादायक कहानियां : सच्ची प्रार्थना SACHCHI prarthana
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  • प्रेरणादायक कहानियां : सबसे बड़ा गुरु sabse bada guru
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    प्रेरणादायक कहानियां : सबसे बड़ा गुरु  Motivational Stories :  sabse bada guruVoice :Rachita TandonPrernadayak kahaniyan sangyatandon glass neeche rakh dijiye प्रेरणादायक कहानियां संज्ञाटंडन सबसे बड़ा गुरु sabse bada guru

  • प्रेरणादायक कहानियां : ब्लैक बेल्ट black belt
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  • प्रेरणादायक कहानियां :  बुद्ध और अनुयायी Buddh aur anuyaai
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     प्रेरणादायक कहानियां : बुद्ध और अनुयायी  Motivational Stories : Buddh aur anuyaaiVoice :Rachita TandonPrernadayak kahaniyan sangyatandon glass neeche rakh dijiye प्रेरणादायक कहानियां संज्ञाटंडन बुद्धऔरअनुयायी Buddh aur anuyaai

  • प्रेरणादायक कहानियां : पचास का नोट Pachaas ka note
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    प्रेरणादायक कहानियां : पचास का नोट Motivational Stories :  Pachaas ka noteVoice :Rachita TandonPrernadayak kahaniyan sangyatandon glass neeche rakh dijiye प्रेरणादायक कहानियां संज्ञाटंडन पचास का नोट Pachaas ka note

  • प्रेरणादायक कहानियां :  सन्यासी की जड़ी बूटी Sanyasi ki jadi booti
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    प्रेरणादायक कहानियां :  सन्यासी की जड़ी बूटी                                                                            Motivational Stories : Sanyasi ki jadi bootiVoice :Rachita TandonPrernadayak kahaniyan sangyatandon glass neeche rakh dijiye प्रेरणादायक कहानियां संज्ञाटंडन सन्यासी की जड़ी बूटी Sanyasi ki jadi booti

  • प्रेरणादायक कहानियां : त्रिपपेल फिलर टेस्ट trippel filter test
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    प्रेरणादायक कहानियां :  त्रिपपेल फिलर टेस्ट                                                                          Motivational Stories : trippel filter testVoice :Rachita TandonPrernadayak kahaniyan sangyatandon glass neeche rakh dijiye प्रेरणादायक कहानियां संज्ञाटंडन त्रिपपेल फिलर टेस्ट trippel filter test

Language

English

Genre

Kids & Family

Seasons

1